Shero Shayari in Hindi

Shero Shayari in Hindi

Shero Shayari in Hindi के इस Best Shayari के Collection में आपका स्वागत है दोस्तों ...

 

अलविदा कह के जब वो चल दिए...
इन आँखों ने सारे हसीन ख्वाब खो दिए...
दर्द तब नहीं हुआ जब वो हमें छोड़ दिए...
दिल के टुकड़े टुकड़े तो तब हुए जब...
वो हमें अलविदा कहते ही खुश हो गए...

 

कि चाह कर भी तेरे करीब नहीं जा सकता...
कि ना जाने कैसी ये मजबुरी है...
हाँ मोहब्बत मेरी एकतरफा है ना...
शायद इसीलिए ये अधूरी है...

 

इरादा कत्ल का था तो मेरा सर कलम कर देते...
क्यों इश्क में डूबो कर तूने मेरी हर साँस पर मौत लिख दी...

 

हमें मालुम था अपने दिल्लगी का नतिजा...
तभी मोहब्बत से पहले शायरी लिखी थी हमने...

 

शायद मेरी  नेकियों का कुछ असर अभी बाकी है...
या कि तुम्हारी कोशिशों में कुछ कसर अभी बाकी है...
गर्दिशों में रहकर भी अगर मुकर्रर है मेरा वजूद...
तो मंजिल है तेरी दूर तेरा सफर अभी बाकी है...

 

पहुंच ना सकेंगे तुम तक पैगाम आँखों के...
नजरों ने शर्म का जो पर्दा डाल रखा है...
हया को कितनी हिफाजत से पाल रखा है...
तेरे लिये ही तो हमने खुद को सम्भाल रखा है...

 

उसने यार बदल दिया और मैंने शहर बदल दिया...
और ज्यादा फर्क कहाँ रहा हमारी मोहब्बत में...
उसने मुस्कुराकर मुझे छोड़ दिया और...
मैंने रो कर उसे छोड़ दिया...

 

न जाने किस तरह का इश्क कर रहे है हम...
जिसके कभी हो ही नही सकते उसी के हो रहे है हम...

 

तुम्हारे नाम को होंठों पर सजाया है मैंने...
तुम्हारी रूह को अपने दिल में बसाया है मैंने...
दुनिया आपको ढूंढते ढूंढते हो जायेगी पागल...
दिल के ऐसे कोने में छुपाया है मैंने... 

 

तेरी निगाहों को पर्दे की जरूरत क्या है जानेमन...
वैसे भी कौन रहता है होश में इन्हें देखने के बाद...

 

और कितने आंसू बहाऊँ उसके लिए...
जिसको खुदा ने मेरे नसीब में लिखा ही नहीं...

 

यह कैसी मोहब्बत है यह कैसी इबादत है...
आपही को मानते है खुदा...
फिर आप ही से यह शिकायत क्यों है...

 

सिसकियाँ लेता है वजूद मेरा गालिब...
नोंच नोंच कर खा गई तेरी याद मुझे...

 

जब कुछ नहीं रहा पास तो...
रख ली तन्हाई संभाल कर मैंने...
ये वो सल्तनत है जिसके बादशाह भी हम...
वजीर भी हम हैं और फकीर भी हम...

 

औकात की बात मत कर पगली... 
हम जिस गली में पैर रखते हैं...
वहाँ की लड़कियाँ अक्सर कहती हैं कि...
बहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है...

 

कभी खुशियों का सरगम लिखेंगे...
कभी आँखों का पानी लिखेंगे...
मिल के अब हम बड़े प्यार से...
जिन्दगी की कहानी लिखेंगे...

 

तमन्ना तेरे जिस्म की होती तो छीन लेते दुनिया से...
इश्क तेरी रूह से है इसलिए खुदा से मांगते हैं तुझे...

 

तेरी झील सी आँखों में डूब जाने का दिल चाहता है...
वफा पर तेरी बर्बाद हो जाने का दिल चाहता है...
कोई सम्भाले हमें बहक रहे हैं कदम...
तेरे इश्क में मर जाने का दिल चाहता है...

 

बहुत सुकून मिलता है जब उनसे हमारी बात होती है...
वो हजारों रातों में वो एक रात होती है...
जब निगाहें उठा कर देखते हैं वो मेरी तरफ...
तब वो ही पल मेरे लिए पूरी कायनात होती है...

 

किसी न किसी को किसी पर एतबार हो जाता है...
एक अजनबी सा चेहरा ही यार हो जाता है...
खूबियों से ही नहीं होती मोहब्बत सदा...
किसी की कमियों से भी कभी प्यार हो जाता है...

 

दिल का हाल बताना नहीं आता...
हमें ऐसे किसी को तड़पाना नहीं आता...
सुनना तो चाहतें हैं हम उनकी आवाज को...
पर हमें कोई बात करने का बहाना नहीं आता...

 

इल्जाम तो हर हाल में काँटों पर ही लगेगा...
ये सोचकर अक्सर कुछ फूल भी चुपचाप जख्म दे जातें हैं...

 

तेरे लिए ही हर वक्त लबों पर दुआ क्यों है...
अगर इतनी ही मोहब्बत है तो हम जुदा क्यों हैं...

 

तू चाँद तो मैं एक सितारा होता इस आसमान में....
वहाँ भी एक आशियाना हमारा होता लोग तुम्हें दूर से देखते...
और नजदीक से देखने का हक बस हमारा होता...

 

कैसे लफ्जों में बयां करूँ मैं खूबसूरती तुम्हारी...
सुंदरता का झरना भी तुम हो मोहब्बत का दरिया भी तुम हो...

 

तुम्हारे नाम को होंठों पर सजाया है मैंने...
तुम्हारी रूह को अपने दिल में बसाया है मैंने...
दुनिया आपको ढूंढते ढूंढते हो जायेगी पागल...
क्योंकि दिल के ऐसे कोने में छुपाया है मैंने...

 

इजहार ऐ इश्क की खतिर कई अल्फाज सोचे थे...
खुद ही को भूल बैठें हम जब तुम सामने आये...

 

तेरी अदाओं का मेरे पास कोई जवाब नहीं है...
अब मेरी आँखों में तेरे सिवा कोई ख्वाब नहीं है....
तुम मत पूछो मुझे कितनी मोहब्बत है तुमसे...
इतना ही जानो मेरी मोहब्बत का कोई हिसाब नहीं...

 

मुझे मालूम है कि ये ख्वाब झूठे हैं...
और ख्वाहिशें अधूरी हैं मगर जिंदा रहने के लिए...
कुछ गलतफहमियां भी जरूरी है...

 

पता नहीं इतनी अदाएं कहाँ से लाती हो...
बस पलकें झुकाती हो और कहर ढा जाती हो...

 

कोशिश बहुत की राज ऐ मोहब्बत बयां ना हो...
पर मुमकिन कहाँ था कि
इस चाँद के आगे दिल में आग ना लगे...

 

मिले जो महबूब तो शराब सा मिले...
कि बेखुदी ऐसी हो कि फिर होश ना रहे... 

 

कल्पना हो तुम मेरी एक नया एहसास हो..
मिले तो नहीं अभी तक पर लगता है तुम पास हो...

 

मुझे रब ने सिर्फ सब को तंग करने के लिए बनाया है...
ये इश्क का तो तूने हम पर इल्जाम लगाया है...

 

दूरियों से फर्क नहीं पड़ता है...
बात तो दिलों की नजदीकियों से होती है...
दिल के रिश्ते तो किस्मत से बनते है वरना...
मुलाकात तो जाने कितनों से होती है...

 

सितारे भी जाग रहे हो रात भी सोई ना हो...
ऐ चाँद मुझे वहाँ ले चल जहाँ उसके सिवा कोई ना हो...

 

सितारे भी जाग रहें हो रात भी सोई ना हो...
ऐ चाँद मुझे वहाँ ले चल जहाँ उसके सिवा कोई ना हो...

 

जब कोई ख्याल दिल से टकराता है...
दिल न चाह कर भी खामोश रह जाता है...
कोई सब कुछ कहकर प्यार जताता है...
कोई कुछ न कहकर भी सब बोल जाता है...

 

रात तो क्या पूरी जिन्दगी भी...
जाग कर गुजार दूँ तेरी खातिर...
बस तू एक बार कह कर तो देख कि....
मुझे तेरे बिना नींद नहीं आती...

 

दीदार की तलब हो तो नजर जमाये रखना...
क्योंकि नसीब हो या दुपट्टा सरकता जरुर है...

 

हाथ में कलम आँखों में ख्वाब लिए फिरता हूँ...
कहानी मेरी मैं खुद लिखूँगा...
कुछ गम कुछ खुशियों के पल लिखूँगा...
तकदीर में लिखा कौन बदलेगा...
जब मेरी किस्मत मैं खुद लिखूँगा...

 

नींद चुराने वाले पूछते हैं सोते क्यों नहीं...
इतनी ही फिक्र है तो फिर हमारे होते क्यों नहीं...

 

मेरे चेहरे की हंसी हो तुम...
मेरे दिल की हर खुशी हो तुम...
मेरे होंठों की मुस्कान हो तुम...
धड़कता है मेरा ये दिल जिसके लिए...
बस वही मेरी जान हो तुम...

 

तुम मेरी बातों का जवाब नहीं देते तो कोई बात नहीं...
मेरी कब्र पर जब आओगे तो हम भी ऐसा ही करेंगे...

 

तेरे प्यार में दो पल की जिंदगी बहुत है...
एक पल की हँसी और एक पल की खुशी बहुत है...
यह दुनिया मुझे जाने या ना जाने...
तेरी आँखें मुझे पहचान ले बस यही बहुत है...

 

कहा सवालों ने तुमसे जवाब मांगते हैं...
हम अपनी आँखों के हिस्से का ख्वाब मांगते हैं...
हम ही को दरिया पर जाने से रोकने वाले...
हम ही से पानी का सारा हिसाब मांगते हैं...
अजीब लोग हैं इन पर तो रहम आता है...
जो काँटे बो कर जमीन से गुलाब मांगते हैं...

 

गुनहगार तो आपकी नजरें हैं मोहतरमा वरना...
कहाँ ये चाँद से चेहरे नकाब मांगते हैं...

 

नीचे आ गिरती है हर बार दुआ मेरी...
पता नहीं कितनी ऊचाई पर खुदा रहता है... 

 

उसको बेवफा कहकर अपनी ही नजर में गिर जाते है हम...
वो प्यार भी अपना था और वो पसंद भी अपनी थी...

 

कितना चाहा कि ना जाऊँ मोहब्बत की गली...
पर इस दिल के आगे मेरी एक ना चली...

 

जिसको चाहा कभी उसको पा ना सके...
हर वादा हम निभा ना सके...
तुमको लगा हमको मिल गई होगी मोहब्बत...
पगली प्यार तो तुमसे था मगर तुमको बता ना सके...

 

खामोश क्यों है ऐ दिल कभी तो सवाल कर...
नाराज है तो टूट जा ऐ दिल मगर जरा संभाल कर...

 

ऐ दिल कहने दे मुझको दिल की बात है...
सो गई है धड़कनें मगर जागे हैं जज्बात...
मुझको छोड़ा है सब ने अब बस खुदा साथ है...
मुझको टूटा समझ के ना ठुकरा ऐ जमाने...
एक दिन बताऊँगा तूझको मेरी भी औकात है...

 

तुझे दिल से जुदा कभी होने नहीं देंगे...
हाथ हमारा कभी छोड़ने नहीं देंगे...
तेरी मुस्कान ही इतनी प्यारी है की...
हम मर भी जाये पर तुझे रोने नहीं देंगे...

 

सपनों की दुनिया में हम खोते चले गए...
मदहोश न थे पर मदहोश होते चले गए...
ना जाने क्या बात थी उस चेहरे में ऐसी...
 ना चाहते हुए भी उसके होते चले गए...

 

माना कि कभी दिल की बात ना बताओगे...
पर आँखों में जो है वो कैसे छुपाओगे...
वादा रहा ये हमारा तुमसे ऐ सनम...
जब भी दिल में झाकोगे हमारी ही तस्वीर पाओगे...

 

ये आलम शौक का देखा न जाये...
वो बुत है या खुदा है देखा न जाये...
ये किन नजरों से तुम ने आज देखा मुझको...
कि तेरा देखना ​भी अब देखा ​ना जाये... 

 

बचपन में जहाँ चाहा हँस लेते थे...
जहाँ चाहा रो लेते थे...
पर अब मुस्कान को तमीज चाहिए...
और आंसुओ को तन्हाई...

 

हुस्न और इश्क का झगड़ा कोई मसला ही नहीं...
रूठना और मनाना तो अदा है इनकी...

 

रुलाना था तो हंसाया क्यों जाना था तो मनाया क्यों...
जब हो ही नहीं सकते मेरे तो...
मेरी आँखों में सपना सजाया क्यों...

 

मोहब्बत सिर्फ दो जिस्मों की दास्तान नहीं...
ये एक रुह पर रुह के फना होने की कहानी है...

 

अगर मेरे नाम पर एक दफा भी धड़क उठे तुम्हारा दिल...
तो समझ लीजिएगा इश्क सच्चा है हमारा... 

 

कोई उम्मीद नहीं थी हमें उनसे...
मुहब्बत की एक जिद थी कि...
दिल टूटे तो सिर्फ उनके हाथ से टूटे...

 

नादान है मेरी जिन्दगी इसलिए चुप हूँ...
दर्द ही दर्द सुबह शाम इसलिए चुप हूँ...
कैसे कह दूँ जमाने से दास्तान अपनी...
उसमें आएगा तेरा नाम इसलिए चुप हूँ...

 

कोई भी फर्क नहीं होता है...
जहर और प्यार में...
जहर पी कर लोग मर जाते हैं और...
प्यार करके लोग जी नहीं पाते हैं...

 

वो रात दर्द और सितम की रात होगी...
जिस रात रुखसत उनकी बारात होगी...
उठ जाता हूँ मैं ये सोचकर नींद से अक्सर कि...
एक गैर की बाहों में मेरी सारी कायनात होगी...

 

जहर भी है... एक दवा भी है इश्क... 
तुझसे और तुझ तक... मेरी रजा है इश्क...
जिस्म छू कर तो... हर कोई एहसास पा जाए...
रूह तक महसूस हो... वो नशा है इश्क...

 

उसके इन्तजार के मर रहें हैं हम...
उसकी यादों के सहारे कब तक जिएंगे हम...
दुनिया जीत कर भी क्या करना है अब हमें...
जिसे दूनिया से जीता था आज उसी से हारे हैं हम...

 

इतनी लम्बी उम्र की दुआ मत माँग मेरे लिए...
ऐसा ना हो कि...
तू भी छोड़ दे और मौत भी ना आए...

 

वो तो दिवानी थी मुझे तन्हा छोड़ गई...
खुद न रुकी तो अपना साया छोड़ गई...
दुख न सही पर गम इस बात का है कि...
आँखों से किया वादा वो होंठो से तोड़ गई...

 

वो मोहब्बत भी तेरी थी वो नफरत भी तेरी थी...
वो अपनाने और ठुकराने की हर अदा भी तेरी थी...
हम अपनी वफा का इंसाफ माँगते भी तो कैसे...
वो शहर भी तेरा था वो अदालत भी तेरी थी...

 

यारों जरा देखो जमाने को...
हम पर क्या क्या इल्जाम लगा दिया...
आँखें उनकी नशीली थी और...
हम पर शराबी का इल्जाम लगा दिया...

 

इबादत रब की हो और जब सूरत यार की हो...
सजदा रब का और रस्म प्यार की हो...
आशिकों के मजहब का क्या कहना...
जिक्र रब का और बात जब यार की हो...

 

मोहब्बत में हमने नसें काट ली थी जनाब...
मगर मौत तब हुई...
जब उसने बोला तो मैं क्या करूँ...

 

तेरे साथ के आगे जन्नत कुछ भी नहीं और...
तेरे साथ के सिवा मेरी कोई मन्नत भी नहीं...

 

मुद्दत से जिसके वास्ते दिल बेकरार था...
वो लौट के ना आई जिसका इंतजार था...
मंजिल करीब आई तो वो दूर हो गयी...
इतना तो बता जाती कि मेरा कैसा प्यार था...

 

निगाहें जब मिली उनसे तभी दिल हार बैठा हूँ...
मैं उस पर सब कुछ लुटाने के लिए तैयार बैठा हूँ...
अगर एक बार कह दे वो कि आ जाओ मेरे दिल में...
मैं दुनिया की सारी रस्मों को भी भुलाने बैठा हूँ... 

 

तुम्हें कभी पूरा लिखूँ कभी अधूरा लिखूँ...
मैं रातों में बैठकर तुम्हें सवेरा लिखूँ...
मैं जब भी लिखूँ बस इतना लिखूँ...
मुझे तेरा और तुझे मेरा लिखूँ...

 

कभी मैं भी तेरी मोहब्बत के नशे में था...
मेरी आँख में भी खुमार था मगर अब नहीं...
कभी ये दिल बाग-ओ-बहार था मगर अब नहीं...
तेरा जिक्र वजह-ऐ-करार था मगर अब नहीं...

 

प्रेम पारस है जिसे छू ले उसे कुंदन कर दे...
प्रेम इबादत है जिसे हो जाए उसे खुदा कर दे...
प्रेम सफर है जिसे हो जाय उसे मुसाफिर कर दे...
प्रेम तपस्या है जिसे हो जाय उसे फकीर कर दे...
प्रेम गजब है जिसे हो जाये उसे जन्नत दे दे...

 

तू ही मिल जाये मुझे ये ही काफी है...
मेरी हर साँस ने बस यही दुआ माँगी है...
जाने क्यों दिल खींचा जाता है तेरी तरफ...
क्या तुमने भी मुझे पाने की कोई दुआ माँगी है...

 

लिख देना ये अल्फाज मेरी कब्र पर कि...
मौत अच्छी है मगर...
किसी से दिल लगाना ठीक नहीं...

 

कल मोहब्बत के शहर में गजल सुनाने गया था...
पता चला मोहब्बत आज मेरे घर तक चली आई...
वो आगे बढ़ गई मेरे हालात को देखकर...
यारों ये मोहब्बत तो मेरी उम्मीद से महंगी थी...

 

जल्दी में था कोई शायद...
कहानी इश्क की अधूरी छोड़ गया...
लफ्जों से बात ना बनी तो...
कमबख्त वो खामोशी से दिल तोड़ गया...

 

शिकायत मौत से नहीं अपनों से थी मुझे...
जरा सी आँख बंद क्या हुई वो कब्र खोदने लगे...

 

कैसे बयान करें आलम दिल की बेबसी का...
वो क्या समझे दर्द इन आँखों की नमी का...
उनके चाहने वाले इतने हो गए हैं कि...
अब उन्हे एहसास ही नहीं हमारी कमी का...

 

निगाहें फेर कर जो हमसे दूर बैठे हो...
इधर भी देखिए मोहतरमा हम बेकसूर बैठे हैं... 

 

क्या वो भी रोया होगा मुझे छोड़ जाने के बाद...
जो हर पल मुझे...
अपनी जिंदगी की इबादत और आदत कहा करता था...

 

पलकों को कभी हमने भिगोए ही नहीं...
वो सोचते हैं की हम कभी रोये ही नहीं...
वो पूछते हैं कि ख्वाबो में किसे देखते हो...
और हम हैं की उनकी यादो में सोए ही नहीं...

 

मैं चूड़ियाँ ही कांच की दे पाया था उसे...
फिर यूँ हुआ कि वो सोने के कँगन पर मर गई...

 

खुदा ने यूँ ही नहीं लिखा तुझे मेरी किस्मत में...
वो भी जानता है कि मुझे कितनी मोहब्बत है तुमसे...

 

एक मजबूत दोस्ती को रोज-रोज बात करने...
या साथ रहने की जरुरत नहीं होती...
जब तक रिश्ता दिल में जिंदा रहता है... 
सच्चे दोस्त कभी अलग नहीं होते...

 

वो पल में बीते साल लिखूँ या सदियों लम्बी रात लिखूँ...
मैं तुमको अपने पास लिखूँ या दूरी का एहसास लिखूँ...

 

जीने के लिए नहीं चाहा है तुम्हें...
तुम्हें चाहने के लिए जीते हैं अब हम...

 

आँसू तब नहीं आते जब आप किसी को खो देते हो..
आँसू तब आते हैं जब खुद को...
खोकर भी किसी को पा नहीं सकते...

 

दिल से दिल मिले होते तो हमारे भी सपने पुरे हो जाते...
फूल काँटों पर नहीं खिले होते तो...
फूल तो कोई भी बन जाते अगर कांटे नहीं होते...

 

हमारी शायरियाँ के जादू से तुम कहाँ वाकीफ हो...
हम उन्हे भी महब्बत सीखा देते हैं....
जिन्हे इश्क का शौक भी ना हो...

 

तुझसे दूर रहकर मोहब्बत बढ़ती जा रही है...
क्या कहूँ कैसे कहूँ ये दुरी तुझे और करीब ला रही है...

 

कैसे करे इंतजार तेरे लौट आने का अभी तो...
दिल को यकीन नहीं हुआ है तेरे चले जाने का...

 

तेरी याद में तबियत मचल जाती है...
वक़्त-ऐ-शाम की सूरत बदल जाती है...
जब तीर ख्यालों का चुभता है जिगर में...
तो मेरे सब्र की नीयत पिघल जाती है...

 

हर किसी के दिल में किसी की प्यास है...
जिन्दगी में हर पल किसी की आस है...
क्यों चाँद रहता है तन्हाई में...
जब चाँदनी हरदम उसी के पास है...

 

उमर की राह मे रस्ते बदल जाते हैं...
वक्त की आंधी में इन्सान बदल जाते हैं...
सोचते हैं तुम्हें इतना याद न करें लेकिन...
आँखें बंद करते ही इरादे बदल जाते हैं...

 

नजरें करम मुझ पर इतना न कर कि...
तेरी मोहब्बत के लिए बागी हो जाऊँ... 
मुझे इतना न पिला इश्क-ऐ-जाम कि...
मैं इश्क के जहर का आदी हो जाऊँ...

 

वक़्त जाता है मगर नादानी नहीं जाती...
कभी चाहत की दिल से रवानी नहीं जाती...
तुम मत करो खामोशी दरमियाँ इरादों के...
कभी किसी भी खौफ से जवानी नहीं जाती...

 

हर शख्स दुनिया में हम सफर ढूँढ़ता है...
हर ख्वाब तदबीरों का असर ढूँढ़ता है...
बंदिश रुक जाती है रस्मों की राह में...
जब किसी को कोई दर-बदर ढूँढ़ता है...

 

नजर मिलती है मगर कोई बात नहीं होती...
चाहत के कदमों की कोई रात नहीं होती...
मेरी गुफ्तगू होती है गमें-ख्याल से मगर...
रूबरू तुमसे कोई मुलाकात नहीं होती...

 

मैं तेरी तमन्ना को छोड़कर आया हूँ...
मैं दर्द की बंदिश को तोड़कर आया हूँ...
भूल गया हूँ मंजिल को राह-ऐ-इश्क की...
मैं यादों की लहर को मोड़कर आया हूँ...

 

तेरे दिल की बात बदल न जाए कहीं...
वक़्ते-मुलाकात निकल न जाए कहीं...
कब तक करूँ यकीन तेरे प्यार पर...
तन्हाई में रात ढल न जाए कहीं...

 

तेरी याद मुझसे भुलायी न गयी...
तेरी याद दिल से मिटायी न गयी...
चाहत जल रही है सीने में मगर...
आग तिश्नगी की बुझायी न गयी...

 

मुझे तेरी चाहत ने सँभलने न दिया...
मुझे दर्द से खुद को जुदा करने न दिया...
आती रहती है सदा यादों की हर-पल...
मुझे जख्म देकर भी कभी मरने न दिया...

 

तेरी बेकरारी आज भी कमाल है...
मेरी जिन्दगी को तेरा ही ख्याल है...
भूल चुका हूँ गम के अंजाम को मगर...
तेरी जुदाई का आज भी मलाल है...


 
तुम कभी तो आओगे सबको छोड़कर...
रस्मों की जंजीर से खुद को तोड़कर...
हमको मिल जाएँगी कभी तो मंजिलें...
दर्द की राहों से रुख अपना मोड़कर...

 

मैं होश में होकर भी मदहोश सा रहता हूँ...
मैं यादों की चुभन को खामोश सा सहता हूँ...
अब खौफ इस कदर है इस बेरहम जमाने का...
मैं गमें-तन्हाई से दिल की बात करता हूँ...

 

मैं जी रहा हूँ तुमको पाने की आस लिए...
मैं जी रहा हूँ सीने में तेरी प्यास लिए...
यादें बंधी हुई हैं साँसों की डोर से...
चाहत के रंगों में तेरा एहसास लिए...

 

जब भी तेरी यादें पलक खोलतीं हैं...
कश्तियाँ खयाल की साँसों में डोलतीं हैं...
लफ्ज तोड़ देते हैं खामोशी अपनी...
मंजिलें भी तेरा ही नाम बोलतीं हैं...

 

टूट गया हूँ मैं गमें-अंजाम देखकर...
टूट गया हूँ मैं गमें-नाकाम देखकर...
चाहत रो रही है राहे-तन्हाई में...
तेरी बेवफाई का पैगाम देखकर...

 

तेरी चाहत मेरी आदत की तरह है...
मेरी जिन्दगी में इबादत की तरह है...
धड़कनों में गूँजती है यादों की सदा...
मेरी बंदगी की इबारत की तरह है...

 

तुम मेरी मोहब्बत को इन्कार न करो...
तुम मेरी आरजू को लाचार न करो...
मैं जी रहा हूँ जिन्दगी उम्मीदों पर...
तुम मेरी कोशिशों को यूँ बेकार न करो...

 

तुझे भूलने की कोशिश नाकाम हो रही है...
तेरे बगैर मेरी तन्हा शाम हो रही है...
मैं भूल गया हूँ अपनी तमन्नाओं को मगर....
हर साँस की रवानी तेरे नाम हो रही है...

 

तेरे इंतजार में कब से उदास बैठे हैं...
तेरे दीदार में आँखे बिछाये बैठे हैं...
तू एक नजर हम को देख ले बस...
इस आस में कब से बेकरार बैठे हैं...

 

कब तक रहेगी मेरे सब्र की घड़ी...
हर वक़्त घेरती है यादों की लड़ी...
बेबसी का दौर है आज भी कायम...
दर्द की लकीरें हैं मेरी हथकड़ी...

 

जब भी गुजरे रुक गए हम खंडहरों के पास...
जैसे कुछ यादें हो अपनी उन घरों के आस पास...
इस तमन्ना में ही अब तो कट रही है जिंदगी...
इस सफर के बाद शायद घर आ जाएगा...
कहने को तो इस शहर में कुछ नहीं बदला...
पर मौसम अब वो सुहाने नहीं होते...
जहाँ ठहर जाओ वहीं अपना बसेरा है...
हम आवारा परिंदों के ठिकाने नहीं होते...
सुर्ख गुलाब सी तुम हो जिन्दगी के बहाव सी तुम हो...
हर कोई पढ़ने को बेकरार पढ़ने वाली किताब सी तुम हो...

 

जो तेरे गुलाबी लब मेरे लबों को छू जाये...
मेरी रूह का मिलन तेरी रूह से हो जाये...
जमाने की साजिशों से बेपरवाह हो जाये...
मेरे ख्वाब कुछ देर तेरी बाहों में सो जाये...
मिटा कर फासले हम प्यार में खो जाये... 
आ कुछ पल के लिये एक-दूजे के हो जाये...

 

तेरे सिवा कोई मेरे जज्बात में नहीं...
आँखों में वो नमी है जो बरसात में नहीं...
पाने की कोशिश तुझे बहुत की मगर...
तू एक लकीर है जो मेरे हाथ में नहीं....

 

हसरतें कुछ और है वक्त की इल्तजा कुछ और है...
कौन जी सका है जिन्दगी अपने मुताबिक...
दिल चाहता कुछ और है होता कुछ और है...

 

हिस्सा हिस्सा तुझे लिखूँ कैसे...
किस्सा किस्सा मेरी किताब है तू...
तेरी आँखों के चंद ख्वाबो में...
मेरी किस्मत की हसीन रात है तू...
कैसे लिख दूँ कि दूर है कितना...
मेरी साँसों के साथ साथ है तू...

 

गरीबी रातभर लड़ती रही सर्द हवाओं से...
अमीरी ने कहा वाह क्या मौसम आया है...

 

बित गया बचपन आयी है जवानी... 
ऑफिस में ही बीत जाती है जिंदगी की कहानी...

 

सोचा था इस कदर उनको भूल जाएँगे...
देखकर भी अनदेखा कर जाएँगे...
पर जब जब सामने आया उनका चेहरा...
सोचा एक बार देख लें अगली बार भूल जाएँगे...

 

फिर तलब हुई है तुम्हारे होंठो की...
मैं मयखाने से प्यासा लौट आया हूँ...
शिकार होने तुम्हारी कातिल निगाहों से...
मैं फिर वही दिल लाया हूँ...

 

इन आँखों को जब जब उनका दीदार हो जाता है...
दिन कोई भी हो लेकिन मेरे लिए त्यौहार हो जाता है...

 

मैंने पूछा एक पल में जान कैसी निकलती है...
उसने चलते चलते मेरा हाथ छोड़ दिया...

 

तबाह हूँ तेरे प्यार मे तुझे दूसरों का ख्याल है...
कुछ मेरे मसले पर भी गौर कर मेरी जिन्दगी का सवाल है...

 

डर यह भी है कि कही मैं तुझे खो ना दूँ...
सच यह भी है कि मेने तुम्हें पाया भी तो नहीं...

 

माना कि ना देखा है ना छुआ है ना पाया है तुझको...
लेकिन तेरे इश्क में सा सुकून आया है मुझको...

 

तुम ही तुम दिखते हो हमे कुछ तो हुआ जरूर है...
ये आईने की भूल है या मेरी निगाहों का कसूर है...

 

गम नहीं, शिकवा नहीं, अफसोस में दिल रोया है...
कितना बदनसीब है वो जो पाकर हमें खोया है...

 

ये बहारे हम पर इस कदर छा गई...
निगाहें निगाहों से टकरा गई...
ये जो दिल की बात थी लबों पर आ गई...

 

कितनी मतलबी हो गई है ऐ मेरी आँखे...
तेरे दीदार के बिना इनको दुनिया अच्छी नहीं लगती...

 

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Shero Shayari in Hindi

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