Chand Shayari

Chand Shayari

Chand Shayari के इस Best Shayari के Collection में आपका स्वागत है दोस्तों ...

 

इश्क के चाँद को अपनी पनाह में रहने दो...
लबों को ना खोलो आँखों को कुछ कहने दो...

 

किसकी क्या मजाल थी जो कोई हम को खरीद सकता...
हम तो खुद ही बिक गए इस चाँद से खरीदार देखकर...

 

हर कोई तुमसा खास नहीं होता...
जो खास होता है वोह कभी पास नहीं होता...
यकीन ना आये तो चाँद को ही देखो...
जिसके दूर होते हुए भी दूरी का एहसास नहीं होता...

 

सितारे भी जाग रहे हो रात भी सोई ना हो...
ऐ चाँद मुझे वहाँ ले चल जहाँ उसके सिवा कोई ना हो...

 

उसने खिड़की से चाँद देखा था...
यारों मैंने खिड़की में चाँद देखा था...

 

गुनहगार तो आपकी नजरें हैं मोहतरमा वरना...
कहाँ ये चाँद से चेहरे नकाब मांगते हैं...

 

सितारे भी जाग रहे हो रात भी सोई ना हो...
ऐ चाँद मुझे वहाँ ले चल जहाँ उसके सिवा कोई ना हो...

 

तेरी आँखों में हमे जाने क्या नजर आया...
तेरी यादों का दिल पर सुरुर है छाया...
अब हमने चाँद को देखना छोड़ दिया और...
तेरी तस्वीर को हमने दिल में छुपा लिया...

 

कभी सीने से लगाकर सुन वो धड़कन...
जो हर पल तेरे साथ जीने की तमन्ना करती है...

 

तुम सुबह का चाँद बन जाओ...
मैं सांझ का सूरज हो जाऊँ...
मिलें हम तुम यूँ भी कभी...
तुम मैं हो जाओ मैं तुम हो जाऊँ...

 

घर बना कर मेरे दिल मे वो चली गई है...
ना खुद रहती है और ना किसी और को बसने देती है...

 

है चाँद सितारों में चमक तेरे प्यार की...
हर फूल से आती है महक तेरे प्यार की...

 

तुम आ गये हो तो फिर चाँदनी सी बातें हों...
अब भला जमीं पर चाँद कहाँ रोज रोज उतरता है...

 

वो दूर है पर दूर ही सही हमें है उसकी जुस्तजु...
चाँद का अपना गुरूर है और हमारी अपनी जिद...

 

रात में छिपकर मिलने का मुकदमा हुआ था हम पर...
जीत पक्की थी पर चाँद गवाही दे गया...

 

चाँद तो अपनी चाँदनी को ही निहारता है...
उसे कहाँ खबर कोई चकोर प्यासा रह जाता है...

 

मेरा और चाँद का मुक़द्दर एक जैसा है...
वो तारो में अकेला मैं हजारो में अकेला...

 

मेरे शहर में खुदाओं की कमी नहीं...
दिक्कत मुझे इन्सान ढूंढने में होती है...
लेकिन लोगों को क्या पता कि...
हमारे पास खुद का एक चाँद है...

 

कोशिश बहुत की राज ऐ मोहब्बत बयां ना हो...
पर मुमकिन कहाँ था कि
इस चाँद के आगे दिल में आग ना लगे...

 

ये दिल न जाने क्या कर बैठा...
मुझसे बिना पूछे ही फैसला कर बैठा...
इस जमीन पर टूटा सितारा भी नहीं गिरता और...
ये पागल चाँद से मोहब्बत कर बैठा...

 

तुम्हारी मोह्हबत का ही असर है कि...
हम चाँद में भी तुम्हे देखते हैं...

 

ऐ काश मेरी किस्मत में ऐसी भी कोई शाम आ जाए...
एक चाँद फलक पर निकला हो एक छत पर आ जाए...

 

तुम पहचान सकते थे जब मेरे प्रेम को तब...
तुमने आँखें उठाकर चाँद को देखना उचित समझा...

 

मेरे हाथों में एक शक्ल चाँद जैसी है...
तुम्हें ये कैसे बताऊँ कि ये रात कैसी है...

 

नाराज ना होना हमारी बेमतलब की शायरियों से क्योंकि...
इन्ही हरकतों से हम हमेशा आपको याद आएँगे...
शायद आपको पता नहीं इस चाँद के टुकड़े को...
हम कब से देख कर जिन्दगी जीये जा रहे हैं...

 

रंग और नूर से भरी शाम हो आपकी...
चाँद सितारों से ज्यादा शान हो आपकी...
इस जिन्दगी में बस एक ही आरजू है हमारी...
कि बंदर से ऊँची छलांग हो आपकी...

 

चाँद भी झांकता हैं पर्दों से...
मेरी तन्हाई का चर्चा अब आसमानों में है...

 

एक चाँद ही तो था गवाह मेरी बेगुनाही का...
मुंशिफ ने पेशी मेरी अमावस के दिन रख दी...

 

छू लेता शायद मैं भी कूद कर चाँद को...
खुदा ने ख्वाहिशें तो दी मगर हाथ छोटे रखे...

 

चाँद भी बड़ा नटखट है जो छुपाता हैं तारो को...
और हमारी गहरी नींदों में सजाता है सपनो को...

 

खूबसूरत गजल जैसा है तेरा चाँद सा चेहरा...
निगाहें शेर पढ़ती हैं तो लब इर्शाद करते हैं...

 

तस्वीर बनाकर तेरी आसमान पर टांग आया हूँ...
और लोग पूछते हैं आज चाँद इतना बेदाग कैसे है... 

 

घूँघट में इक चाँद था और सिर्फ तन्हाई थी...
आवाज दिल के धड़कने की भी फिर जोर से आयी थी...

 

प्यार से जो मैंने घूँघट चाँद पर से हटाया था...
प्यार का रंग भी उतरकर उसके चेहरे पर आया था...

 

आसमान में एक दिन मैं तारे गिन रहा था...
हर तारे मैं मुझे तू नजर आ रही थी...
तो मैंने सोचा तारे से क्या तारीफ करूँ तेरी फिर...
मैंने चाँद को देखा तो उसमें भी तुम नजर आने लगी...

 

वो कहता है मुझसे डरने लगा है...
शायद मोहब्बत करने लगा है...
सोचता था चाँद सबसे हसीन है...
पर देखा तुझे तो भरम मेरा टूट गया...
जोखिम उठाकर उससे उसका पता पूछा था...
मुस्कुरा कर वो बोले तेरे दिल में रहते हैं...

Chand Shayari for Girlfriend

तेरे बाद हमने दिल का दरवाजा खोला ही नहीं...
वरना बहुत से चाँद आए इस घर को सजाने के लिए... 

 

चाँद के हुस्न पर हर सख्स का हक है...
पर मैं उसे कैसे कहूँ कि रात को निकला न करे...

 

जो बात अपने चाँद की है उसकी बात ही जुदा है...
ये चांदनी इश्क की है कोई उलझे आशिक का नहीं...

 

तेरी आँखों में हमें जाने क्या नजर आया...
तेरी यादों का मेरे दिल पर सुरुर है छाया...
अब हमने चाँद को देखना छोड़ दिया...
और तेरी तस्वीर को दिल में छुपा लिया...

 

चाँद ने की होगी सूरज से महोब्बत...
इसलिए तो चाँद में दाग है...
मुमकिन है चाँद से हुई होगी बेवफाई
इसलिए तो सूरज में आग है...

 

चाँद निकलेगा तो लोग दुआ मांगेंगे...
हम भी अपने मुकद्दर का लिखा मांगेंगे...
हम तलबगार नहीं दुनिया की दौलत के...
हम रब से सिर्फ आपकी वफा मांगेंगे... 

 

तू चाँद और मै सितारा होता और आसमान में...
एक आशियाना हमारा होता लोग तुम्हें दूर से देखते...
पर नजदीक से देखने का हक बस हमारा होता...

 

उतरा था चाँद हमारे आंगन में...
पर सितारों को गँवारा न था...
हम तो सितारों से भी बगावत कर लेते...
पर चाँद ही हमारा ना था...

 

चाँद का मिजाज भी बिल्कुल तुम्हारे जैसा है...
जब देखने का मन करता है नजर ही नहीं आता है...

 

आज तस्वीर तेरी बनाकर आसमान पर टांग आया हूँ...
और अब लोग पूछते हैं आज चाँद इतना बेदाग कैसे है...

 

मेरा और उस चाँद का मुकद्दर एक जैसा है...
वो तारों में भी तन्हा है और मैं यारों में... 

 

खबर मिली है जबसे ये कि उनको हमसे प्यार है...
नशे में तबसे चाँद है और सितारों पे खुमार है...

 

कहाँ से लाऊँ वो लफ्ज जो तेरी तारीफ के काबिल हो...
कहाँ से लाऊँ वो चाँद जिसमें तेरी खूबसूरती शामिल हो...
ऐ मेरे बेवफा सनम एक बार बता दे मुझको...
कहाँ से लाऊँ वो किस्मत जिसमें तू बस मुझे हासिल हो...

 

रात को रात का तोहफा नहीं देते...
दिल को जज्बात का तोहफा नहीं देते...
देने को तो हम आप को चाँद भी दे देंगे...
मगर चाँद को चाँद का तोहफा नहीं देते...

 

दूर देख के चाँद को कोई जल रहा होगा...
किसी का दिल मिलने के लिए मचल रहा होगा...
उफ्फ मेरे पैरों में ये चुभन कैसी है जरुर कोई...
मेरा अपना कोई काँटों पे चल रहा होगा...

 

चाँद निकलेगा तो लोग दुआ मांगेंगे...
हम भी अपने मुकद्दर का लिखा मांगेंगे...
हम तलबगार नहीं दुनिया की दौलत के...
हम रब से सिर्फ आपकी वफा मांगेंगे...

 

वो दरवाजे पर खड़ी थी मैं खिड़की के पास खड़ा था...
दिल की जमीन पर एक चांद को देखा था...
दिल उसके दीदार को तरसा था बात लबों पर रुकी थी...
खामोशी सब बोल रही थी...
एक दिल था जो शोर कर रहा था...
एक आँखें थी जो ख्वाब देख रही थी...
चाहतों का सैलाब था जो बोल रहा था...
हाँ, वो तूम ही हो जिसे मैं ढूंढ रहा था जन्मों से...

 

हम तो थे ठहरे हुए पानी पर किसी चाँद का अक्स...
जिसे वो अच्छे भी लगे उसने भी पत्थर फेंका...

 

अपनी निगाहों से न देख खुद को...
हीरा भी तुझे पत्थर लगेगा और वो भी तुम्हें देख शरमा जाए...
सब कहते होंगे चाँद का टुकड़ा हो तूम...
मेरी नजरों से अगर देखे कोई तुम्हें चाँद भी तेरा टुकड़ा लगेगा...

 

दोस्तों बहुत जल्दी ही HD Shayari Images को Upload किया जायेगा जिसे आप Download कर सकेंगे... 

 

Chand Shayari

के इस Best Collection में से अगर आप Shayari के किसी Photo को Download करना चाहते हैं तो बस आपको उस Photo पर Click करना है और तुरंत HD Photo Download हो जायेगा फिर आप उसे आप अपने दोस्तों के साथ Share कर सकते हैं।

Thank You ... Friends


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